इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी की आयु का निर्धारण किशोर न्याय कानून के अंतर्गत ही किया जाएगा। किशोर न्याय कानून के तहत हाई स्कूल प्रमाण-पत्र आयु निर्धारण के लिए मान्य सबूत है। ऐसे में जब हाई स्कूल प्रमाणपत्र मौजूद हो तो अन्य साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है।
आयु निर्धारण को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दिनांक 16/12/2021 को एक महत्वपूर्ण फैसला किया। न्यायालय ने कहा अपराध के आरोपी की आयु का निर्धारण किशोर न्याय कानून के अंतर्गत ही किया जाएगा. किशोर न्याय कानून के अंतर्गत हाई स्कूल प्रमाणपत्र आयु निर्धारण के लिए मान्य सबूत है। ऐसे में जब हाई स्कूल प्रमाणपत्र मौजूद हो तो अन्य साक्ष्य की आवश्यकता नहीं होगी। कोर्ट ने प्राथमिक विद्यालय के रजिस्टर की प्रविष्टि के आधार पर आयु निर्धारण न करने के आदेश को सही माना। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को वैध करार दिया।
सुरेंद्र सिंह की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को न्यायालय ने खारिज करते हुए यह बात कही। याचिका में अतिरिक्त जिला जज जालौन उरई के विपक्षी रामू सिंह को किशोर ठहराने के आदेश को चुनौती दी गई थी। शिकायत कर्ता के पुत्र की हत्या के आरोप में 20 मार्च 2015 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 16 अक्टूबर 2015 को 8 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. विपक्षी रामू सिंह ने हाई स्कूल प्रमाणपत्र के आधार पर स्वयं को किशोर घोषित करने की मांग में अर्जी दी थी। याची की तरफ से विरोध किया गया था कि हाई स्कूल प्रमाणपत्र में विपक्षी की जन्म तिथि 4 मई 1997 दर्ज है। इसके अनुसार घटना के समय विपक्षी की आयु 17 वर्ष 10 माह 15 दिन है। याची ने प्राथमिक विद्यालय के रजिस्टर के आधार पर विपक्षी की जन्म तिथि 3 जुलाई 1996 होने के आधार पर आयु 21वर्ष होने के कारण आपत्ति दर्ज की थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा - हाई स्कूल प्रमाणपत्र किसी आरोपी या अपराधी की उम्र तय करने के लिए मान्य सबूत है।
विपक्षी की बात को मानते हुए न्यायालय ने अर्जी मंजूर कर ली थी और विपक्षी को किशोर घोषित किया था। इसे पुनरीक्षण याचिका में चुनौती दी गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अपराध के आरोपी की आयु का निर्धारण किशोर न्याय कानून के तहत ही किया जाएगा। जस्टिस संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने दिया यह आदेश ।
Comments
Post a Comment