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Court Cannot Issue Process U/S 82 Or 83 CrPC Without Recording Satisfaction That Persons Were Deliberately Avoiding Service: Patna HC Reiterates https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court/patna-high-court-court-proclamation-property-attachment-section-82-83-crpc-

      Patna High Court Ajeet Kumar vs The State Of Bihar on 14 August, 2024 Author: Partha Sarthy Bench: Partha Sarthy           IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA                   CRIMINAL MISCELLANEOUS No.66151 of 2023      Arising Out of PS. Case No.-791 Year-2015 Thana- AURANGABAD COMPLAINT CASE                                       District- Aurangabad      ====================================================== 1.    AJEET KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWAR SINGH 2.   PAPPU KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWR SINGH      BOTH   RESIDENTS      OF    VILLAGE-   NARAYANPUR, P.O.-      KAPSIYAWAN, P.S.- HILSA, DISTRICT- NALANDA             ...

मानसिक बीमारी के आधार पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पति को तलाक की डिक्री प्रदान की

दिल्ली उच्च न्यायालय ने १६ वर्ष पुराने एक विवाह को विच्छेदित करते हुए निर्णय दिया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ जीवनसाथी के साथ रहना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें पत्नी ने यह तथ्य छुपाया था कि वह सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी। जस्टिस विपिन सांघी और जसमीत सिंह की पीठ ने पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विवाह केवल सुखद यादों और अच्छे समय से नहीं बनता है, विवाह में दो व्यक्तियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं और एक साथ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे साथी के साथ रहना आसान नहीं है, जो मानसिक रूप से अस्वास्थ्य  हो, इस तरह की समस्याओं का सामना करने वाले व्यक्ति के लिए अपनी अलग चुनौतियां होती हैं, और इससे भी अधिक उसके जीवनसाथी के लिए। विवाह में समस्याओं और भागीदारों के बीच संचार की समझ होनी चाहिए, विशेषकर जब विवाह में दो पक्षों में से एक ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहा हो।   न्यायालय ने पत्नी द्वारा विवाह से पूर्व अपनी मानसिक बीमारी का खुलासा नहीं करने पर कहा कि यह याची के साथ एक धोखाधड़ी थी। कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने कभी भी पति को अपनी मानसिक बीमारी के बारे में नह...

क्या दहेज उत्पीड़न के मामले मे पति के परिवार के सदस्यों को आरोपी बनाया जा सकता है।

 दहेज उत्पीड़न के एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने एक महिला और एक पुरुष के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवादों में बार-बार पति के परिवार के सदस्यों को प्रथम सूचना रिपोर्ट में यूं ही घसीटकर आरोपित बनाया जा रहा है।जोकि गलत है।     जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस हृषिकेश राय की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें दहेज हत्या के मामले में आरोपित मृतका के देवर और सास को समर्पण करने और जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया था।    शीर्ष न्यायालय ने कहा कि बड़ी संख्या में परिवार के सदस्यों को प्राथिमिकी में यूं ही नामों का उल्लेख करके प्रदर्शित किया गया है, जबकि विषय-वस्तु अपराध में उनकी सक्रिय भागीदारी को उजागर नहीं करती, इसलिए उनके खिलाफ मामले का संज्ञान लेना उचित नहीं था। यह भी कहा गया है कि इस तरह के मामलों में संज्ञान लेने से न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि मृतका के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का अवलोकन करने से आरोपित की संलिप्तता को उजागर करने वाले किसी ...

किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी कब आवश्यक है

   इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रूटीन गिरफ्तारी को लेकर अहम निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि विवेचना के लिए पुलिस कस्टडी में पूछताछ के लिए जरूरी होने पर ही गिरफ्तारी की जाए। कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए. गैरजरूरी गिरफ्तारी मानवाधिकार का हनन है। जोगिंदर सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि रूटीन गिरफ्तारी पुलिस में भ्रष्टाचार का स्रोत है। रिपोर्ट कहती है 60 फीसदी गिरफ्तारी गैरजरूरी और अनुचित होती है। जिस पर43.2 फीसदी जेल संसाधनों का खर्च हो जाता है।    उच्च न्यायालय ने कहा कि वैयक्तिक स्वतंत्रता बहुत ही महत्वपूर्ण मूल अधिकार है। बहुत जरूरी होने पर ही इसमें कटौती की जा सकती है। गिरफ्तारी से व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचती है। इसलिए अनावश्यक गिरफ्तारी से बचना चाहिए। कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट गाली-गलौज करने के आरोपी राहुल गांधी की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा है कि गिरफ्तारी के समय 50 हजार के मुचलके व दो प्रतिभूति लेकर जमानत पर रिहा कर दिया जाए। यह आदेश जस्टिस अजीत सिंह के एकल पी...

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प्रोटेस्ट पीटिशन में अपनाई जाने वाली प्रकिया /process followed in protest petition

सत्र न्यायालय को न्यायिक दिमाग के आवेदन के बिना छोटे मुद्दों पर जमानत आवेदनों को खारिज नहीं करना चाहिए: इलाहाबाद उच्च न्यायालय