Posts

Showing posts from December 26, 2021

Court Cannot Issue Process U/S 82 Or 83 CrPC Without Recording Satisfaction That Persons Were Deliberately Avoiding Service: Patna HC Reiterates https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court/patna-high-court-court-proclamation-property-attachment-section-82-83-crpc-

      Patna High Court Ajeet Kumar vs The State Of Bihar on 14 August, 2024 Author: Partha Sarthy Bench: Partha Sarthy           IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA                   CRIMINAL MISCELLANEOUS No.66151 of 2023      Arising Out of PS. Case No.-791 Year-2015 Thana- AURANGABAD COMPLAINT CASE                                       District- Aurangabad      ====================================================== 1.    AJEET KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWAR SINGH 2.   PAPPU KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWR SINGH      BOTH   RESIDENTS      OF    VILLAGE-   NARAYANPUR, P.O.-      KAPSIYAWAN, P.S.- HILSA, DISTRICT- NALANDA             ...

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 397 के अंतर्गत अपराध के आवश्यक तत्व क्या है

शिकायतकर्ता की शिकायत दर्ज करने और जांच पूरी होने पर, पुलिस ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 392/397 और मध्य प्रदेश डकैती और व्यापार प्रभाव क्षेत्र अधिनियम १९८१  की धारा 11/13 के अंतर्गत आरोप पत्र दाखिल किया।           26 फरवरी, 2013 को विचारण न्यायालय ने अपीलकर्ता और छोटू के खिलाफ आईपीसी की धारा 392/397 और एमपीडीवीपीके अधिनियम, 1981 की धारा 11/13 के अंतर्गत आरोप तय किए। सबूतों का विश्लेषण करने पर, विचारण न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ता और उसके सह-आरोपी घटना में लिप्त थे और आरोप को साबित किया गया है। तदनुसार सजा और दोषसिद्धि करार दे दी।      विचारण न्यायालय के फैसले का विरोध करते हुए, अपीलकर्ता और सह-आरोपी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि उनके खिलाफ मामले में झूठा आरोप लगाया गया था और आईपीसी की धारा ३९७ के अंतर्गत आरोप कायम नहीं रखा जा सकता है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि आग्नेयास्त्र भले ही साबित हो गया हो, लेकिन इसका प्रयोग नहीं किया गया था और इस तरह धारा 397 आईपीसी के अंतर्गत आरोप तय नहीं होगा। सबूतों की विस्तार से ...

क्या पुलिस सात वर्ष तक सजा के मामले मे मुकदमा दर्ज होते ही गिरफ्तार कर सकती है। can police arrest on registration of case in seven years imprisonment cases

लाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले में यह निर्णय दिया है कि जब तक पुलिस जांच अधिकारी इस बात से संतुष्ट नहीं होते कि किसी मामले के आरोपी की गिरफ्तारी आवश्यक है, तब तक उसकी गिरफ्तारी न की जाए।          न्यायालय ने कहा कि पुलिस मुकदमा दर्ज होते ही आरोपी की सामान्य तरीके से गिरफ्तारी न करे। किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी तभी की जाए, जब मामला सीआरपीसी की धारा 41ए के मानकों पर खरा उतरता हो।     न्यायालय ने कहा कि पुलिस अधिकारी गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पूर्व उसकी गिरफ्तारी को लेकर एक चेक लिस्ट तैयार करें और उसमें गिरफ्तारी के कारण का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए। पुलिस अधिकारी को यह स्पष्ट रूप से कथन करना होगा कि मामले में अभियुक्त की गिरफ्तारी क्यों आवश्यक है। साथ ही मजिस्ट्रेट पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन करें और उस पर अपनी सन्तुष्ट होने के बाद ही गिरफ्तारी के आदेश को आगे बढ़ाएं।      यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ के जे ठाकर एवं न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने  विमल कुमार एवं तीन अन्य की याचिका पर सुनवा...

Popular posts from this blog

Court Cannot Issue Process U/S 82 Or 83 CrPC Without Recording Satisfaction That Persons Were Deliberately Avoiding Service: Patna HC Reiterates https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court/patna-high-court-court-proclamation-property-attachment-section-82-83-crpc-

प्रोटेस्ट पीटिशन में अपनाई जाने वाली प्रकिया /process followed in protest petition

सत्र न्यायालय को न्यायिक दिमाग के आवेदन के बिना छोटे मुद्दों पर जमानत आवेदनों को खारिज नहीं करना चाहिए: इलाहाबाद उच्च न्यायालय