Posts

Court Cannot Issue Process U/S 82 Or 83 CrPC Without Recording Satisfaction That Persons Were Deliberately Avoiding Service: Patna HC Reiterates https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court/patna-high-court-court-proclamation-property-attachment-section-82-83-crpc-

      Patna High Court Ajeet Kumar vs The State Of Bihar on 14 August, 2024 Author: Partha Sarthy Bench: Partha Sarthy           IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA                   CRIMINAL MISCELLANEOUS No.66151 of 2023      Arising Out of PS. Case No.-791 Year-2015 Thana- AURANGABAD COMPLAINT CASE                                       District- Aurangabad      ====================================================== 1.    AJEET KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWAR SINGH 2.   PAPPU KUMAR SON OF VIJAY PRASAD @ PARMESHWR SINGH      BOTH   RESIDENTS      OF    VILLAGE-   NARAYANPUR, P.O.-      KAPSIYAWAN, P.S.- HILSA, DISTRICT- NALANDA             ...

why permit to loudspeaker on mosque

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार और पुलिस से पूछा कि कानून के किन प्रावधानों के तहत 16 मस्जिदों को लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के उपयोग की अनुमति दी गई है और इस तरह के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण नियम के तहत क्या कार्रवाई की जा रही है। चीफ ज‌स्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सचिन शंकर मखदूम ने आदेश में कहा, "प्रतिवादी राज्य के अधिकारियों को यह बताना होगा कि कानून के किन प्रावधानों के तहत, लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के उपयोग को प्रतिवादियों ने 10 से 26 मस्जिदों में उपयोग की अनुमति दी है और उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार क्या कार्रवाई की जा रही है।" याचिकाकर्ता राकेश पी और अन्य की ओर से पेश अधिवक्ता श्रीधर प्रभु ने कहा कि 2000 के नियमों के नियम 5 (3) के तहत लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के उपयोग की अनुमति स्थायी रूप से नहीं दी जा सकती है। नियम 5(3) के तहत लाउड स्पीकर/पब्लिक एड्रेस सिस्टम (और ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों) के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। यह राज्य सरकार क...

शराब की बू आने का मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति नशे में था', केरल उच्च न्यायालय का फैसला

केरल हाईकोर्ट ने कहा, 'निजी स्थानों पर शराब का सेवन करना तब तक अपराध नहीं है, जब तक इससे जनता को कोई परेशानी न हो. कोर्ट ने ये भी कहा कि शराब की बू का मतलब यह नहीं कि वो शख्स नशे में है।  केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया कि निजी स्थान पर शराब का सेवन तब तक अपराध नहीं है जब तक कि वे जनता में कोई उपद्रव नहीं करते हैं।  याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करते हुए, जस्टिस सोफी थॉमस ने टिप्पणी की:  "किसी को भी परेशान या परेशान किए बिना निजी स्थान पर शराब का सेवन करना कोई अपराध नहीं होगा। केवल शराब की गंध का मतलब यह नहीं लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति नशे में था या किसी शराब के प्रभाव में था।"  याचिकाकर्ता पर केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118 (ए) के तहत एक आरोपी की पहचान करने के लिए बुलाए जाने पर एक पुलिस स्टेशन के समक्ष कथित तौर पर शराब के नशे में पेश होने के लिए मामला दर्ज किया गया था।  अधिवक्ता आई.वी.  प्रमोद, के.वी.  याचिकाकर्ता की ओर से पेश शशिधरन और सायरा सौरज ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक ग्राम सहायक है और उसे शाम 7:00 बजे स्टेशन...

How fixed the capacity of child witness /बाल साक्षी की क्षमता का निर्धारण कैसे हो?

बाल  स क्षी कौन है ?      बाल साक्षी वह व्यक्ति है जिसकी आयु 16 वर्ष की पूरी नहीं हुई है। कभी -2 ऐसी परिस्थिति में अपराध कारित किया जाता है कि उस घटना का कोई व्यस्क व्यक्ति साक्षी उ...

प्रोटेस्ट पीटिशन में अपनाई जाने वाली प्रकिया /process followed in protest petition

उच्चतम न्यायलय ने विष्णु कुमार तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य सु कोर्ट 2019 के वाद में यह व्यवस्था की है कि प्रोटेस्ट पीटिशन में कौन सी प्रकिया अपनायी जानी चाहिए ?       न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसैफ की खण्ड पीठ ने यह मत व्यक्त किया कि प्रोटेस्ट पीटिशन को परिवाद के रूप में लेना चाहिए। यदि वह एक परिवाद की आवश्यकताऔं को पूर्ण करता है तो मजिस्ट्रेट  दण्ड प्रकिया संहिता की धारा 200 एवं 202 की पालना कर सकता है।      बैंच ने यह भी कहा कि यदि मजिस्ट्रेट प्रोटेस्ट पीटिशन को परिवाद की तरह नहीं लेता तो परिवादी के लिए उपचार होगा कि वह एक नया परिवाद संस्थित करे। और मजिस्ट्रेट से दण्ड संहिता की धारा 200 एवं 202 की पालना करने की अपेक्षा करे।       उच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर बहुत से निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि प्रोटेस्ट पीटिशन दायर करने का संहिता में कोई प्रावधान नहीं है परन्तु यह व्यवहार में है।     प्रोटेस्ट पीटिशन कोन दायर कर सकता है?            भगव...

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के अंतर्गत उच्च न्यायलय की अंतर्निहित शक्तियां

     इस धारा के अंतर्गत ऐसे मामले आते हैं जिसमे कानून द्वारा न्यायालय के ऊपर यह निर्णय छोड दिया जाता है कि वह अपने विवेक से परिस्थिति के अनुसार निर्णय करे। इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 को कानून में शामिल किया गया है। यहाँ हम यह भी जानेंगे कि इस धारा के अंतर्गत किस प्रकार के मामले आते हैं और वो किन परिस्थितियों में एवं किस प्रकार से निपटाये जायेंगे। इन्ही शक्तियों को हम न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों के रूप में जानते हैं।     धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता 1973 - इस संहिता की कोई भी बात उच्च न्यायलय की ऐसे आदेश देने की अंतर्निहित शक्ति को सीमित या प्रभावित करने वाली नहीं समझी जायेगी जो इस संहिता के अधीन किसी आदेश को प्रभावी करने के लिए या किसी न्यायालय की कार्यवाही का दुरुपयोग निवारित करने के लिए या अन्य प्रकार से न्याय के उद्देश्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो।     अर्थात इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायलय की अंतर्निहित शक्तियों को इस संहिता के किसी प्रावधान से सीमित नहीं किया जा सकता है। यह वो अंतर्निहित शक्तियो...

Weather Allegation Of Fault On His Advocate is Reasonable Cause For Delay condonation -क्या अपने वकील पर उपेक्षा का आरोप लगाना देरी को माँफ करने का उचित कारण है

  इस लेख में मैं माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के माध्यम से यह दर्षित करूंगा कि किसी विधिक मामले में देरी करने का आरोप अधिवक्ता पर लगाकर क्या देरी को माँफ कराया जा सकता ह...

क्या NDPS की धारा 42 का अनुपालन आवश्यक है - Whether compliance of section 42 NDPS act is necessary

    इस भाग में मैं यह वर्णन करूंगा कि जब पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करती है या उसकी तलाशी लेती है जिसके कब्जे में कोई नशीला पदार्थ अवैध रूप से पाया जाता है तो क्या धारा 42 NDPS का पालन करना अनिवार्य होगा। इस प्रश्न का उत्तर निम्न वाद के निर्णय से प्राप्त होगा -          सुखदेव सिंह  बनाम  पंजाब राज्य     माननीय उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में उक्त वाद में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायलय के फैसले के खिलाफ सुखदेव सिंह की अपील पर निर्णय दिया है कि धारा 42 का पुलिस द्वारा पालन न किये जाने पर उसे बरी कर दिया गया है। धारा 42 के अन्तर्गत जांच अधिकारी को बगेर किसी वारण्ट या अधिपत्र के ही तलाशी लेने, मादक पदार्थ जब्त करने और गिरफ्तार करने का अधिकार होता है। लेकिन इस धारा में यह भी प्रावधान है कि मादक पदार्थ के बारे मे किसी अधिकारी को यदि गुप्त सूचना मिलती है तो उसे तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए ।      इससे पहले इस तरह की सूचना तुरन्त भेजने का प्राविधान था। निर्दोष को झूठा न फसाया ज...

भारत में संविदा कैसे होती है /Contract in India

संविदा की परिभाषा -   भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 2(ज) के अनुसार, विधि द्वारा प्रवर्तनीय करार संविदा है।    संविदा के आवश्यक तत्व        (1) कोई करार किया गया हो।        (2) करार विधि द्वारा प्रवर्तनीय हो।   (1)करार -प्रत्येक वचन या वचन का वर्ग जो एक दूसरे के लिए प्रतिफल हो ,करार कहलाता है।   (2) विधि द्वारा प्रवर्तनीय करार - धारा 10 के अनुसार, वे सभी करार संविदा हैं जो संविदा करने के लिए सक्षम पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से किसी विधिपूर्ण प्रतिफल के लिए और विधिपूर्ण उद्देश्य से किये गये हैं एवं अभिव्यक्त रूप से शून्य घोषित नहीं किये गये हैं ।    इसलिये मान्य संविदा के लिए निम्नलिखित शर्तें पूर्ण होना आवश्यक है -    (1) पक्षकार सक्षम हों ।    (2) सम्मति स्वतंत्र हो ।    (3) प्रतिफल और उद्देश्य विधिपूर्ण हो।     (4) अभिव्यक्त रूप से शून्य न घोषित किये गये हों ।    (5) यदि अपेक्षित हो तो करार लिखित एवं रजिस्टर्ड होना चाहि...

अवयस्क की संविदा का प्रभाव (Effect of contract with minor)

    भारतीय व्यस्कता अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, अवयस्क वह व्यक्ति होता है जो 18 वर्ष से कम आयु का है।   अवयस्क की संविदा की प्रकृति         धारा 11 भारतीय संविदा अधिनियम के अनुसा...

लोक सेवकों को प्राप्त संवैधानिक संरक्षण ( Protection For Public Servant Under Indian Constitution)

  सरकारी कार्य लोक सेवकों द्वारा किए जाते हैं इसलिए लोक सेवकों का निष्पक्षता एवं स्वतन्त्रता से कार्य करना भी आवश्यक होता है। इसलिए संविधान में लोक सेवकों को कुछ संरक्ष...

किसी राज्य मे संवैधानिक तंत्र की विफलता

   भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 में यह व्यवस्था की गई है कि यदि किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को लिखित रुप में प्रतिवेदन पत्र प्राप्त होता है या उसका अन्यथा यह स...

भारतीय संविधान में आपात उपबन्ध (Emergency provision in Indiana Constitution)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 352 से 360 तक में तीन प्रकार के आपातो की व्यवस्था की गई है। जो निम्न है - 1. राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा । 2. किसी राज्य मे संवैधानिक तंत्र की विफलता। 3. वित्ती...

Reservation under Constitution -आरक्षण सम्बन्धी संवैधानिक उपबन्ध -

              भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15-16, 330-331, 333 तथा 334 के  अधीन आरक्षण सम्बन्धी उपबंधों की विवेचना की गई है। जो निम्न प्रकार है --     अनुच्छेद 15 --धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म -स्थ...

Popular posts from this blog